Hindi Diwas

Hindi Diwas

हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य को सर्वांगसुंदर बनाना हमारा कर्त्तव्य है|
“डॉ. राजेंद्रप्रसाद”

भाषा विचार की पोशाक है ,भाषा हमारे भावों की अभिव्यक्ति है, भाषा संवादों की अभिव्यक्ति है| सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव ने सुख साधनों और ख्वाहिशों को पूरा करने की भरपूर कोशिश की| जो निरंतर जारी है| अपने मन में उठने वाले हर विचार ,हर उदगार को एक साधन की जरूरत थी, जिस से वह अपने मन की बात दूसरे तक पहुंचा सके और इस साधन को नाम दिया गया – भाषा

हाँ ! यह सही है कि भाषा शब्दों की मोहताज नहीं|

बिना शब्दों के भी हम विचारों की भाषा को पढ़ लेते हैं , समझ लेते हैं, अपना लेते हैं| विभिन्न संस्कृति और समुदाय के लोगों ने अपने-अपने विचार और भावनाओं को अपनों तक पहुंचाने के लिए जिन वर्णों का, जिन शब्दों और चिह्नों का चयन किया वही लिपि बन गई और वही भाषा बन गई| भाषा का इतिहास बहुत पुराना है विश्व में कितनी भाषाएं है यदि सरकारी मान्यता के तौर पर ना देखें तो उनकी गिनती भी नहीं कर सकते|

भाषा वह अभिव्यक्ति है जो आपके विचारों को सामने वाले तक पहुंचाने पर आपको सुकून देती है| आपकी बात को समझ लेने पर आपके अंदर जो उमंग, उत्साह और शांति मिलती है, वह है भाषा| बच्चा जिस परिवार जिस समुदाय में जन्म लेता है उसी की भाषा को अपनाता है| बहुत ही सहज रूप से उस भाषा को वो कब अपना लेता है, बोल लेता है, समझ लेता है, यह किसी को पता नहीं चलता|

अपने राष्ट्र की बात करूं तो भारत में विभिन्न प्रांतों की विभिन्न भाषाएं है | इसके साथ साथ क्षेत्रीय भाषाओं की बोलियां भी दैनिक बोलचाल की भाषा पर अपना असर डालती है| भाषा की मिठास इतनी मीठी है जैसे – कोयल की बोली, कान्हा की मिश्री, मां की पुकार, देवालयों में भक्तों की अरदास, मस्जिद की अजान, गिरजाघर में बजते घंटो की नाद ….

भाषा के स्वरों को बजाते हैं वीणा के तार!

भाषा की महत्ता को समझाते हुए विद्यालयों में प्रतिवर्ष समारोह और आयोजन किए जाते हैं| हिंदी हमारे राष्ट्र की राष्ट्रभाषा मानी जाती है| सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान और विद्यालयों में हिंदी दिवस को भव्य समारोह के रूप में मनाया जाता है| हिंदी भाषा राष्ट्र के गले में मोतियों का हार है| इसी हार के एक मोती को मैनादेवी बजाज इंटरनेशनल स्कूल ने 9 सितंबर 2021 को ‘आह्वान’ के रूप में पिरोया |

आभासी मंच पर कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉक्टर भावना कुंअर, विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ जेनिफर परेरा, समन्वयक श्रीमती पद्मा राव एवं हिंदी भाषा विभाग की शिक्षिका श्रीमती उषा शर्मा द्वारा किया गया |

कक्षा ६ से १२ तक के विद्यार्थियों ने अपना पूर्ण योगदान दिया| हिंदी भाषा में नारा गायन हो या दोहा गायन, नृत्य प्रस्तुती हो या नाट्यं मंचन सभी को खूब सराहा गया| काव्य साहित्यिक भाषा का अभिन्न अंग है| तो फिर कविता पाठ से कैसे दूर रहा जा सकता था| विद्यार्थियों ने रामधारी सिंह दिनकर, शिव मंगल सुमन, गुलजार साहब और कुमार विश्वास, की कविताओं का रसपान कराया|अतिथि के अनमोल वचनों को सुनकर विद्यार्थियों में भाषा के प्रति जो लगाव और श्रधा थी वो चौगुनी हो गयी|

ज्ञान का भंडार कभी रिक्त नही होता| उजाले की किरण से सदा भरता रहता है |भाषा ज्ञान एवं सम्मान की मशाल को सदा साथ ले कर पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढती रहती है| शिक्षक तो मात्र चिंगारी हैं ज्ञान का प्रकाश विद्यार्थियों की समझ से ही प्रकाशित होगा|

“शहर के अंधेरे को इक चराग़ काफ़ी है
सौ चराग़ जलते हैं इक चराग़ जलने से”
– एहतिशाम अख्तर

तो आइये इस वर्ष हिंदी दिवस पर हम सब मिल कर भाषा के ज्ञान को और भी प्रकाशित करें| भाषा की बगिया के हर फूल को इस तरह सुगन्धित करें कि बगीचे की खुशबू सम्पूर्ण विश्व को महका दे|

उषा शर्मा
हिंदी शिक्षिका